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चलो पूरी कायनात का बँटवारा करते है

तुम सिर्फ मेरे बाकी सब तुम्हारा

वो भी जिन्दा है मै भी जिन्दा हूँ

कत्ल तो सिर्फ इश्क का हुआ है

दिल से ही हुक्म लेते है दिल से ही सबक लेते है

आशिक कभी उस्तादो की माना नही करते

महोब्बत रहे या ना रहे

स्कुल की बेन्च पर तेरा नाम आज भी है

Dil Ki Hasrat Zuban Pe Aane Lagi Tune Dekha Aur Zindagi Muskurane Lagi

Ye Ishq Ki Inteha Thi Ya Deewangi Meri Har Soorat Me Soorat Teri Nazar Aane Lagi

हम तो सोचते थे कि लफ्ज ही ‪चोट‬ करते है

पर कुछ खामोशियो के ‪जख्म‬ तो और भी गहरे निकले

न पूरी तरह से क़ाबिल न पूरी तरह से पूरा हूँ

तेरे एक दूर रहने से, देख मैं कितना अधूरा हूँ

कही आदत ना हो जाये जिंदगी की,
इसलिए! रोज़ रोज़ थोड़ा थोड़ा मरते है हम...!!

वो वाकिफ है मेरी बुज़दिली से इसी लिये ये सितम करता है

वो जानता है मौत से ये शक्स डरता नही पर उसके दूर जाने से डरता है

वक़्त बीतने के बाद अक़्सर ये अहसास होता है कि

जो छूट गया वो लम्हा ज्यादा बेहतर था

चले आती है कमरे में दबे पाँव ही हर दफ़े

तुम्हारी यादों को दरवाज़ा खटखटाने की भी तमीज़ नहीं

लफ़्ज़ अल्फ़ाज़ कागज़ और किताब

कहाँ कहाँ नहीं रखता तेरी यादों का हिसाब

er kasz

मुझे तेरे ये कच्चे रिश्ते जरा भी पसंद नहीं आते

या तो लोहे की तरह जोड़ दे या फिर धागे की तरह तोड़ दे

सुना है कि मौत से पहले एक और मौत होती है

और उसे प्यार से लोग मोहब्बत कहते हैं

Khushiyan Bohot Tarasti Hain Milnay Ke Liye Mujhse

wah wah

Or Ghamo Ne To Jese Apne Behn Ki Mangni Kardi Mujhse

जिस घाव से खून नहीं निकलता

समज लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है

LaBh sE aGaR bAat nhi kR sKte toh

AAnkhon hi aAnkhon mE bAat hOnE dO

तुम हक़ीक़त-ए-इश्क़ हों या फ़रेब मेरी आँखों का,

न दिल से निकलते हो न मेरी ज़िन्दगी में आते हो

स्याही थोड़ी कम पड़ गई

वर्ना किस्मत तो अपनी भी खूबसूरत लिखी गई थी

शेरों को कहना नया शिकारी आया हैं

या तो हुकूमत छोड़ दे या जीना

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