कोई हमे भी सिखा दो ये लफ्जों से खेलना
दर्द हमारे पास भी बेहिसाब है
नहीं शिकवा मुझे कुछ तेरी बेवफाई का....
गिला तो तब हो अगर तूने किसी से भी निभायी हो..!!!
कीसी रोज फुरसत मिले तो आना हमारी महफिल में
हम शायरी नहीं दर्दे ए इश्क सुनाते है
उसके दिल पर भी क्या खूब गुजरी होगी
जिसने इस दर्द का नाम मोहब्बत रखा होगा
किसी भी मौसम में ख़रीद लीजिये ज़नाब
मोहब्बत के ज़ख्म हमेशा ताजा मिलेंगे
माना की बुरा हु
लेकिन इतना भी नहीं की याद भी न आउ
मोबाइल के एक फोल्डर में तेरी तस्वीरें इकठ्ठा की है मैंने
बस इसके सिवा और ख़ास कुछ जायदाद नहीं है मेरी
अगर किसी दिन तुम्हे रोना आये तो कॉल जरूर कर लेना
हँसाने की गारंटी तो नही लेता पर तेरे साथ रोऊँगा जरूर
Bahut kuch badla he mene apne aap me lekin
Tumhe vo toot kar chahne ki aadat ab tak nahi badli
खुशियों के गीत गाकर गम के आंसू न बहाना
अकेले जी लेना मगर हसीनों से दिल ना लगाना
इश्क मुकम्मल कब हुआ है जो आज होगा
इतिहास गवाह है किताबो मे भी अधुरा था हकीकत मे भी अधुरा है ..
आज किसी ने बातों बातों में जब उन का नाम लिया
दिल ने जैसे एक पल के लिए धडकना छोड दिया
उस्ताद ए इश्क सच कहा तूने बहुत नालायक हूँ मै
मुद्दत से इक शख्स को अपना बनाना नही आया
बगैर जिसके एक पल भी गुजारा नही होता
सित्म देखिए वही शक्स हमारा नही होता
लुटा चुका हूँ बहुत कुछ, अपनी जिंदगी में यारो,
मेरे वो ज़ज्बात तो ना लूटो, जो लिखकर बयाँ करता हूँ.
होंठो पे हंसी आती है निगाहे झुक जाती है
जब आप सामने आते प्यास लबो की बुझ जाती है
ये तेरी मेरी ही नहीं इस जहाँ में समझ ले
ईश्क की दास्तां हर एक अधूरी है
Ishq itne qareeb se guzra
Mai yeh samjha ke ho chuka mujh ko
आज जिस्म मे जान है तो देखते नही हैं लोग
जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटा हटा कर देखेंगे लोग
हम तो नादान है क्या समझेंगे मोहब्बत के उसूल
बस तुझे चाहा था तुझे चाहते हैं और तुझे ही चाहेंगे
