बस इतना बता दो कैसे साबित करू के तुम याद आते हो
शायरी तुम्हे समझ नहीं आती और अदाए मुझे आती नही
Saare Zamane Me Taqseem Tum Apna Waqt Karte Ho
Faqat Mere Liye Tumko Koi Lamha Nahi Milta
किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल...
कोई रहता भी नही और कमबख्त बिकता भी नही...!
दुकानें उसकी भी लुट जाती है,
जो दिन भर में न जाने कितने ताले बेच देता है !
"दर्द" वो है, जो दूसरों को दर्द में देखकर महसूस हो वरना
अपना दर्द तो जानवरों को भी महसूस होता है...!
सारा बदन अजीब सी खुशबु से भर गया
शायद तेरा ख्याल हदों से गुजर गया
एक तुम एक तुम्हारी आँखें और एक मेरी मोहब्बत
इनमें से कोई एक तो है जो मुझे मरने नहीं देती
वो वाकिफ है मेरी बुज़दिली से इसी लिये ये सितम करता है
वो जानता है मौत से ये शक्स डरता नही पर उसके दूर जाने से डरता है
Israar tha unhe ke bhulaa dijiye zafar
Hum ne bhula dia to woh is pr bhi khush nahin
सूरत नहीं देखी तेरी अरसे से बस वो आखिरी बार का मुस्कुरा के मिलना
आज भी जीने की वजह है मेरी
बिन पूछे आ जाता है कभी सवाल नहीं करता है,
आखिर क्यों तेरा ख़याल मेरा ख़याल नहीं करता है !
सुना है तुम्हारी एक निगाह से कत्ल होते हैं लोग
एक नज़र हमको भी देख लो ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती
बदलता तो इंसान है
वक़्त तो सिर्फ एक बहाना है
तुम्हारी शर्तो से शहेनशाह बनने से बहेतेर है
की अपनी शर्तो पे फ़क़ीर बन जाऊ
नाकामयाब मोहब्बत ही सच्ची होतीं है
कामयाब होने के बाद तो मोहब्बत नही बचती
माना के तेरी नज़र के काबिल नहीं हूँ मैं
कभी उन से भी पूछ, जिन्हें हासिल नहीं हूँ मैं
पत्तों सी होती है कुछ रिश्तों की उम्र भी
आज हरे हैं और कल सूख जाते हैं
मोहब्बत उस से नहीं की जाती जो खूबसूरत हो
खूबसूरत वो होता है जिस से मोहब्बत हो जाती है
Na Jany Zamany Walon Ko Kiya Addawat Hy Hum Sy
K Jiss Ko Hum Chahain Sab Usi K Talab-Gar Ho Jaty Hain…!!!
क्यों इतना दर्द क्यों घुटन इतनी
जो टूट गया ख्वाब ही तो था
