कदर करनी है तो जीते जी करो
अर्थी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते हैं
मत पूछ की मेँ शब्द कहां से ला रहा हूँ
तेरी यादो का खजाना हैँ लुटाए जा रहा हूँ
दिल सुलगता है तो धुआं क्यों नहीं उठता
क्यों वो आग अक्सर आसुओं में बह जाती है
मेरा टूटना बिखरना एक इत्तेफाक नहीं
बहुत मेहनत की है एक शक्स ने इसकी खातिर
Ek khwaish hai khuda se ke vo har kissi ko tere jaisa pyar de
Kyuki vo zindgi me kuch bane ya na banne Salla Shayar to Jarur ban jayega
er kasz
Waqt Yaksaan Nhe Rehta Kabhi Sun Lo,
Khud Bhi Ro Party Hain Auron Ko Hansany Waly.
Tum apne bare mein mujhse bhi pooch sakte ho
Ye tum se kisne kaha ke aaina zarori hai
बिछड के इक दूजे से हम कितने रंगीले हो गए
मेरी आँखे लाल हो गई उनके हाथ पीले हो गए
जो नासमझ है वो ही मोहब्बत करता है
वो मोहब्बत ही क्या जो समझ में आ जाए
er kasz
ये औत बात हैं की तेरे रूबरू नहीं गुज़रा
मैं जिस अज़ाब से गुज़रा तु नही गुज़रा
मुझे मजबूर करती हैं यादें तेरी वरना
शायरी करना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
उसकी याद में दिल चीख-चीख कर रोता हैं
और दुनियाँ कहती हैं इश्क बेजुबान होता हैं
जो उनकी आँखों से बयां होते है
वो लफ्ज़ किताबो में कहाँ होते है
Ab Humara Zikar ,
Hona Chahiye Ye Laila Majnu Ke ,
Kahaani Aakhir Kab Tak
हासिल करके तो हर कोई मोहब्बत कर सकता है
बिना हासिल किए किसीको चाहना कोई हमसे पूछे
वो इस कमाल से खेले थे इश्क की बाजी
मैं अपनी फतह समझता रहा मात होने तक
तुझे मालूम भी है कितना तलबगार हूँ तेरा
पुछ उन फ़रिश्तों से जो रोज़ लीखते है दुअा मेरी
हम तो इश्क़ के नशे में उनको खुदा बना डाले
होश तो तब आया जब उन्होंने कहा की खुद किसी एक का नहीं होता
शिकायत मौत से नहीँ अपनो से थी मुझे
ज़रा सी आँख बंद क्या हुई वो कब्र खोदने लगे !
सुनो जिसका डर था वोही हो गया
मोहब्बत हो गयी है
