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ऐसे जख्मों का क्या करे कोई

जिन्हें मरहम से आग लग जाए

हम जा रहे हैं वहाँ जहाँ दिल की हो कदर

तुम बैठे रहना अपनी अदायेँ सम्भाल कर

मुझे मेरे कल कि फिक्र तो आज भी नही है

पर ख्वाहिश तुझे पाने कि कयामत तक रहेगी

मोहब्बत मे सर को झुका देना कोई मुश्किल नही

रोशन सूरज भी चाँद की खातिर डूब जाता है

कहाँ मिलेगा तुम्हे बुद्धु मेरे जैसा

जो तुम्हारी बेरुखी भी सहे और प्यार भी करे

याद तो आता हूँगा ना तुम्हें मैं

वफाओं का जब कहीं ज़िक्र होता होगा

Ishq itne qareeb se guzra

Mai yeh samjha ke ho chuka mujh ko

कितना मुश्किल है मनाना उस शख्स को

जो रूठा भी न हो और बात भी न करे

बिछड के इक दूजे से हम कितने रंगीले हो गए

मेरी आँखे लाल हो गई उनके हाथ पीले हो गए

ये इश्क़ मोहब्बत की रिवायत भी अजीब है

पाया नहीं है जिसको उसे खोना भी नहीं चाहते

इक पल ही काफ़ी है गर उसमें तुम शामिल हो जाओ

इससे ज्यादा जिंदगी की मुझे जरूरत भी नहीं

महोब्बत रहे या ना रहे

स्कुल की बेन्च पर तेरा नाम आज भी है

मोहब्बत में कभी कुछ वादे किये थे तूने

आज टूटे हुए वादे भी तेरा रास्ता देखते हैं

Phool Mazaar Tak Nahi Pahuncha Daaman-E-Yaar Tak Nahi Pahuncha,

Ho Gaya Vo Kafan Se To Aazaad Phir Bhi Gulzaar Tak Nahi Pahuncha

सुना है आज बिक रहा है इश्क़ बाज़ार में

जाओ उस इश्क़ फरामोश से पूछो वफ़ा भी साथ देता है क्या

तुम्हारे बाद जो होगी वो दिल्लगी होगी

महोबत तो तुम पे ख़तम कर बेठे है

नाज है मुझे तेरी नफरतों का अकेला वारिस हूँ

मोहब्बत तो तुम्हे बहोत से लोगों से है

* बस एक यही बात उसकी मुझे अच्छी लगती है
उदास कर के भी कहती है
तुम नाराज़ तो नहीं हो ना

न हम मुस्कुराते न वो पास आते

इसी की मिली है सजा क्या करे

Ab to ankhon me ummeed ki gunjaish bhi nazar nahi aati

Ashkon ki siyaahi se jo likhe the saare armaan humne

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