स्याही थोड़ी कम पड़ गई
वर्ना किस्मत तो अपनी भी खूबसूरत लिखी गई थी
मिले जब चार कंधे तो दिल ने ये कहा मुझसे
जीते जी मिला होता तो एक ही काफी था
Laut aayi hain barishein fir se yahan wahan
Ek tumhi KO laut k aane ki fursat nahi mili
मेरी तङप तो कुछ भी नही है
सुना है उसके दिदार के लिए आईने तरसते है
मुझे सिर्फ तू पसंद है, ना कोई और.! ना कोई और तेरे जैसा, ना कोई और तेरे अलावा.!
मैंने दिल के दरवाजे पर लिखा अंदर आना सख्त मना है
प्यार हँसता हुआ आया और बड़ी मासूमियत से बोला मुझे माफ करना मैं तो अन्धा हूँ
ज़ख्म क्या दिखाऐ मैने अपने
लोगों ने नमक से मुठियाँ भर ली
दिल सुलगता है तो धुआं क्यों नहीं उठता
क्यों वो आग अक्सर आसुओं में बह जाती है
चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ
एक तारा टूट जाने से फ़लक़ सूना नहीं होता
Use sochna chahiye tha har sitam se pehle
Mai sirf Aashiq hi nahi Insaan bhi tha
लुटा चुका हूँ बहुत कुछ अपनी जिंदगी में यारो
मेरे वो ज़ज्बात तो ना लूटो, जो लिखकर बयाँ करता हूँ
Bharosa Dua Wafa Khawab Maan Mohabbat
Kitne Naam on Mein Simte Ho Sirf Ek Tum
हसरत तो थी कि तेरी आँख का आसूँ बन जाऊं
पर तू रोये ये मुझे गँवारा नहीं
कोई दावत तो उसे दे आए जाकर जनाज़े में मेरे शरीक़ होने की
आखिरी सफर में ही सही हमसफ़र बनाने की आरज़ू तो पूरी हो
कोई हमे भी सिखा दो ये लफ्जों से खेलना
दर्द हमारे पास भी बेहिसाब है
कीसी रोज फुरसत मिले तो आना हमारी महफिल में
हम शायरी नहीं दर्दे ए इश्क सुनाते है
ना जाने क्यो दिन निकलते ही उदास हो जाता हुँ
महसूस होता है कि कोई भूल रहा है हमे धीरे-धीरे
तुम तुम तुम और सिर्फ तुम
एक लम्हा भी सरकता नहीं तुम्हारे बिना
खुशियों के गीत गाकर गम के आंसू न बहाना
अकेले जी लेना मगर हसीनों से दिल ना लगाना
तुम्हे तकलीफ न हो जरा भी चलने में
लो यह दिल चप्पल की जगह पहन लो
er kasz
