मिल जाएँगे हमारी भी तारीफ़ करने वाले
कोई हमारी मौत की अफ़वाह तो फैलाओ यारो
बच न सका ख़ुदा भी मोहब्बत के तकाज़ों से
एक महबूब की खातिर सारा जहाँ बना डाला
मेरा दिल मुझसे कहता है कि वो बापस आयेगी
मैँ दिल से कहता हूँ कि उसने तुझे भी झूठ बोलना सिखा दिया
फुरसत अगर मिले तो मुझे पड़ना जरूर
मै नायाब उलझनों की मुकम्मल किताब हूं
तुझको भूलूँ कोशिश करके देखूंगा
वैसे दरिया उल्टा बहना मुश्किल है
दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो
ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी
ये सोच कर तेरी महफ़िल में चला आया हूँ
तेरी सोहबत में रहूँगा तो संवर जाऊंगा
तेरी वफ़ा के खातिर ज़लील किया तेरे शहर के लोगों ने
इक तेरी कदर न होती तो तेरा शहर जला देते
न हम मुस्कुराते न वो पास आते
इसी की मिली है सजा क्या करे
कितना मुश्किल है मनाना उस शख्स को
जो रूठा भी न हो और बात भी न करे
इश्क़ तो बस नाम दिया है दुनिया ने
एहसास बयां कोई कर पाये तो बात हो
Kadam Ruk Se Gaye Hain Phool Biktey Dekh Kar Woh
Aksar Kaha Krta Tha Muhabbat Phool Jaisi Hai
वो लफ्ज कहां से लाऊं जो तेरे दिल को मोम कर दें;
मेरा वजूद पिघल रहा है तेरी बेरूखी से.
सुनो एक वादा करोगी मुझसे क्या तुम उन पलो को हमेशा संभाल के रखोगी
जिन पलो में तुम मेरे साथ मुस्कुराई थी
कुछ पल खामोशियों में खुद से रूबरू हो लेने दो यारों
ज़िन्दगी के शोर में खुद को सुना नहीं मुद्दतों से मैंने
ऐ दिल सोजा अब तेरी शायरी पढ़ने वाली
किसी और शायर की गजल बन गयी है
खुदा ने सब्र करने की तौफ़ीक़ हमें बख्शी है
अरे जी भर के तड़पाओ शिकायत कौन करता है
न जाने क्यूँ ये रात उदास कर देती है हर रोज
महसूस होता है जैसे भूल रहा है कोई धीरे धीरे
ये इश्क़ मोहब्बत की रिवायत भी अजीब है
पाया नहीं है जिसको उसे खोना भी नहीं चाहते
शिकायत तो नहीं कोई मगर अफ़सोस इतना है
मुहब्बत सामने थी और हम दुनिया में उलझे थे
