तुम तुम तुम और सिर्फ तुम
एक लम्हा भी सरकता नहीं तुम्हारे बिना
लोग पूछते है इतनी शायरी कैसे कर लेते हो
मै कहेता हु इतना आसान नहीं दिल तोड़ना पड़ता है शब्दो को जोडने के लिय
Hum ne To Ek Hi Shaks Par saari Mohabbat Khatam Kardi
Ab Muhabbat Kis Ko Kehte Hai Kuch Maloom Nahi
वो एक मौका तो दे हमे बात करने का.
वादा है
उन्हें भी रुला देंगे उन्ही के सितम सुना -सुना कर...
Rulana hi hai to hasaney ka takalluf kaisa
Kyun zehar de rahe ho muhabbat mila mila kar.
Hadd ho gai intezar ki
aisi ki taisi aise pyar ki
ये जो उम्मीदें है मीठे जहर की माफ़िक़ है
या तो मर ही जाती है या फिर मार देती है
तज़ुर्बा मेरा लिखने का बस इतना सा है
मैं सुनती हूँ वाह वाह अपनी ही तबाही पर
अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आंसू
अभी छेड़ी कहाँ है दास्ताने जिन्दगी मैंने
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है
ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता
राज़ खोल देते हैं नाज़ुक से इशारे अक्सर
कितनी खामोश मोहब्बत की ज़ुबान होती है. !!
हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं
हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर होती है
खुद को खोने का पता नहीं चला
किसी को पाने की यूँ इन्तहा कर दी मैंने
बदनसीबी का मे क़ायल तो नही था
लेकिन मैने बरसात मे जलते हुए घर देखे थे
मेरी खुद्दारी इजाज़त नही देती
कैसे कहूँ कि मुझे तेरी जरुरत है
मैंने जान बचा के रखी है एक जान के लिए
इतना इश्क कैसे हो गया एक अनजान के लिए
तू आज़मा के देख तो सही अपने दीवाने को
मैं दुनिया छोड़ दूंगा तुम्हे अपने करीब लाने के लिए
जब बिखरेगा तेरे रूखसार पर तेरी आँखों का पानी
तुझे एहसास तब होगा मोहब्बत किस को कहते है
बदनसीब मैं हूँ या तू हैं ये तो वक़्त ही बतायेगा..
बस इतना कहता हूँ अब कभी लौट कर मत आना....
कुछ इस तरहा से सौदा कीया मुझसे मेरे वक़्त ने
तजुर्बे देकर वो मुझसे मेरी नादानीया ले गया
er kasz
