दरवाज़ों के शीशे न बदलवा
लोगों ने अभी हाथ से पत्थर नहीं फेंके
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है
ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता
तू इक क़दम भी जो मेरी तरफ बढ़ा देता
मैं मंज़िलें तेरी दहलीज़ से मिला देता
लफ़्ज़ अल्फ़ाज़ कागज़ और किताब
कहाँ कहाँ नहीं रखता तेरी यादों का हिसाब
er kasz
लिख दे मेरा अगला जन्म उसके नाम पर ऐ खुदा
इस जन्म में ईश्क थोडा कम पड गया है
बेवफाई के सितम तुमको भी समझ आ जाते
काश होता अगर तुम जैसा तुम्हारा कोई
तुझे क्या लगता है मुझे तेरी याद नही आती
पगली कौन अपनी बरबादी को भुल सकता है
दोस्तो मुझे मुहब्बत हो गयी है
मैं बच तो जाउंगा ना
इश्क़ तो बस नाम दिया है दुनिया ने
एहसास बयां कोई कर पाये तो बात हो
Kiya Mila Mujhe Saari Umer Mohbbt Kr Ke
Bs Ek Shayri Ka Hunar 0r Aik Raaton Ka Jagna
मोहब्बत में कभी कुछ वादे किये थे तूने
आज टूटे हुए वादे भी तेरा रास्ता देखते हैं
नाज है मुझे तेरी नफरतों का अकेला वारिस हूँ
मोहोबत तो तुम्हे बहोत से लोगों से है
Yad-e-mazi azab hai ya rabb
Cheen ley mujhsey hafiza mera
मुझे मजबूर करती हैं यादें तेरी वरना
शायरी करना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
बदलता तो इंसान है
वक़्त तो सिर्फ एक बहाना है
पूछते हैं सब लोग तुम इतनी अच्छी शायरी कैसे करते हो
तो मुस्कुरा कर कहता हूँ सब कमाल दर्द का है
पागल नहीं थे हम जो तेरी हर बात मानते थे,
बस तेरी खुशी से ज्यादा कुछ अच्छा ही नही लगता था..!!
Us Ki Jeet Se Hoti Hai Khushi Mujh Ko
Yahi Jawab Mare Paas Apni Haar Ka Tha
ऐसा नहीं है हमको बातें बुरी नहीं लगती
एक बस तेरे लिए सारे गुनाह माफ हैं
Use sochna chahiye tha har sitam se pehle
Mai sirf Aashiq hi nahi Insaan bhi tha
