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मुझे उन आंखों मे कभी आंसु अच्छे नही लगते

जीन आंखों मे मै अकसर खुद के लिये प्यार देखता हुं

अगर किसी दिन रोना आये,
तो कॉल करना,

हसाने की गारंटी नही देता हूँ,
पर तेरे साथ रोऊंगा जरुर

शाख से तोड़े गये फुल ने हंसकर कहा

अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में

कभी कभी लंगड़े घोड़े पे दाव लगाना ज्यादा सही होता है‪

क्योंकी दर्द जब जूनून बन जाए तब मंजिल बहुत नज़दीक लगने लगती है

हम तो नादान है क्या समझेंगे मोहब्बत के उसूल

बस तुझे चाहा था तुझे चाहते हैं और तुझे ही चाहेंगे

बदनसीबी का मे क़ायल तो नही था

लेकिन मैने बरसात मे जलते हुए घर देखे थे

एक क़तरा ही सहीं मुझे ऐसी नियत दें मौला


किसी को प्यासा जो देखूँ तो दरियाँ हों जाऊँ

दुश्मन हो तो इश्क जैसा

सीधा दिल पे वार करे

बदनसीब मैं हूँ या तू हैं ये तो वक़्त ही बतायेगा..

बस इतना कहता हूँ अब कभी लौट कर मत आना....

मैंने ये सोचकर‪ उसकी‬ सारी बातो को‪ सच‬ मान लिया की

ईतनी‪ अच्छी‬ है तो‪ झुठ‬ कैसे बोलेगी

दर्द देती है मुझे हमदर्दी हर शख्स की

मेरी दुनिया उजाड़ी थी एक शख्स ने युहीं दिलासे देकर

आज जिस्म मे जान है तो देखते नही हैं लोग

जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटा हटा कर देखेंगे लोग

वो लफ्ज कहां से लाऊं जो तेरे दिल को मोम कर दें;
मेरा वजूद पिघल रहा है तेरी बेरूखी से.

मरहम ना सही मेरे जख्मो पर नमक ही लगा दे..

यकिन मानो तेरे छुने से ये ठीक हो जायेंगें..

लोग रिश्ते भी फायदा देख कर निभाते है

जिनकी जरूरत नही तोड़ दिए जाते है

आज आईने के सामने खड़े होकर खुद से माफ़ी मांग ली मैंने ...
सबसे ज़्यादा खुद का ही दिल दुखाया है औरों को खुश करने में ...

वो किसी और की खातिर हमेँ भूल भी गये तो कोई बात नही

कभी हम भी तो भूल गये थे सारा जहाँ उन्ही की खातिर

भुला दूंगा तुझे थोड़ा सबर रखना

रग-रग में बसी है थोड़ा वक़्त तो लगेगा

ིइतना तो दर्द मुझे जिन्दगी तूने दिया ही नहीं था

जितना बदनाम मैने तूझे वाह वाहीया बटोरने के लिए कर दिया

er kasz

ना जाने किस मिट्टी को मेरे वजुद की ख्वाईश थी

मै ईतना तो बना भी ना,,था जीतना मिटा दिया गया हूँ

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