हाल तो पुछ लु तेरा पर डरता हुँ आवाज़ से तेरी
जब जब सुनी है कमबख़्त मोहब्बत ही हुई है
haQikat to bas Etni hai
ke vo haQikat se AanjaaN hai
er kasz
मत फेर निगाँहे कम्बख़त हमें देख कर
खुद भी रो पड़ेगा हमरे प्यार की तौहीन होती देख कर
er kasz
Akele chalne ki Aadat dall le oo musafir
kyuki tere safar me humsafar ka koi nishan nahi
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मैं दुआ में उसे माँगता हूँ और वो किसी और को
कभी कभी सोचता हूँ भगवान किसकी सुनेगा ?
अपनी आदतों के अनुसार चलने में इतनी गलतियाँ नहीं होती हैं
जितनी दुनिया का लिहाज रखकर चलने में होती हैं
ིइतना तो दर्द मुझे जिन्दगी तूने दिया ही नहीं था
जितना बदनाम मैने तूझे वाह वाहीया बटोरने के लिए कर दिया
er kasz
कफन मे लिपटा देखकर माथा चूम के मेरे दोस्त मुझसे बोले
अरे पागल, नऐ कपडे पहन लिये तो क्या अब बात भी नही करेगा
Aey Ishq Suna Tha Tu Andha hai,
Fir mere Ghar ka Rasta tujhe Kisne Bataya??
ज़िन्दगी का ये हूनर भी आज़माना चाहिए
जंग अगर अपनो से हो तो हार जाना चाहिए
er kasz
इसे इत्तेफाक समझो या दर्दनाक हकीकत,
आँख जब भी नम हुई वजह कोई अपना ही निकला !!
मोहब्बत और भी बढ़ जाती है जुदा होने से..!!
तुम सिर्फ मेरे हो इस बात का ख्याल रखना..!!
सुन कर ग़ज़ल मेरी वो अंदाज़ बदल कर बोले
कोई छीनो कलम इससे ये तो जान ले रहा है
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न शिकायतें न सवाल है कोई आसरा न मलाल है
तेरी बेरुखी भी कमाल थी मेरा जब्त भी कमाल है
और भी बनती लकीरें दर्द की
शुक्र है खुदा तेरा जो हाथ छोटे दिए
कैसे लिखु तेरा नाम बेवफा ये कलम भी
तो तेरे नाम की दीवानी है
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है
ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता
जरा सा भी नही पिघलता दिल तेरा
इतना क़ीमती पत्थर कहाँ से ख़रीदा है
मत पूछ कैसे गुजरे दिन, कैसी बीती रातें
बहुत तनहा जिये हैं हम तुझसे बिछड़ने के बाद..
गुलाम हूँ अपने घर के संस्कारो का… वरना
लोगो को उनकी औकात दिखाने का हुनर आज भी रखता हूँ
er kasz
